रामदेव जी :राजस्थान के लोकदेवता - Rajasthan Study

रामदेव जी :राजस्थान के लोकदेवता

रामदेव जी (रामापीर) – राजस्थान के लोकदेवता | सम्पूर्ण अध्ययन | Rajasthan Study
🚩 राजस्थान लोकदेवता — अध्ययन सामग्री

बाबा रामदेव जी 🐴
राजस्थान के लोकदेवता (रामापीर)

जन्म • जीवन • चमत्कार • समाधि • रामदेवरा मेला • परीक्षा प्रश्नोत्तर

📍 रूणिचा, बाड़मेर 📅 1352 ई. – 1385 ई. 🐴 लीला घोड़ा 🎯 RPSC | RAS | SI | Patwari
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बाबा रामदेव जी (रामापीर) – राजस्थान के लोकदेवता
🚩 बाबा रामदेव जी (रामापीर) — राजस्थान के प्रमुख लोकदेवता
📷 स्रोत: Wikimedia Commons | Ramdev_Pir_3.jpg | लाइसेंस: Public Domain
⚡ एक नज़र में — मुख्य तथ्य
📅
जन्म वर्ष
संवत् 1409
(1352 ई.)
📍
जन्म स्थान
रूणिचा
बाड़मेर जिला
👑
पिता
अजमल जी
(तंवर राजपूत)
🙏
माता
मीणादेवी
(मेणादेवी)
🕉️
अवतार
भगवान कृष्ण
का अवतार
🌟
समाधि वर्ष
संवत् 1442
(1385 ई.)
🌟 परिचय

राजस्थान की पुण्य धरती पर अनेक महान संत और लोकदेवता हुए हैं, जिनमें बाबा रामदेव जी (रामापीर) का स्थान सर्वोपरि है। वे गरीबों और दलितों के उद्धारक, न्यायप्रिय शासक और समाज सुधारक के रूप में पूजे जाते हैं। उनकी पूजा हिंदू और मुस्लिम दोनों करते हैं — हिंदू उन्हें भगवान कृष्ण का अवतार मानते हैं, जबकि मुस्लिम उन्हें रामशाह पीर के नाम से पूजते हैं।

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🏛️ रामदेवरा धाम — मंदिर एवं समाधि
रामदेवरा मंदिर – बाबा रामदेव जी का समाधि मंदिर जैसलमेर राजस्थान
🕌 रामदेवरा मंदिर, जैसलमेर
📷 Wikimedia Commons | CC BY-SA 3.0
बाबा रामदेव जी की समाधि – रूणिचा धाम राजस्थान
🙏 बाबा रामदेव जी की समाधि — रूणिचा धाम
📷 Wikimedia Commons | Public Domain

रामदेव जी का समाधि स्थल रूणिचा धाम (जिसे रामदेवरा भी कहते हैं) राजस्थान के जैसलमेर जिले में पोखरण से 12 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। महाराजा गंगा सिंह ने 1931 में उनकी समाधि के चारों ओर भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। यह मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

📜 जन्म और परिवार

👨‍👩‍👦 पारिवारिक परिचय

  • जन्म: संवत् 1409 (1352 ई.) — चैत्र सुदी पंचमी को
  • जन्म स्थान: रूणिचा (रामदेवरा), बाड़मेर जिला, राजस्थान — वर्तमान में जैसलमेर जिले का हिस्सा
  • पिता: अजमल जी — तंवर वंशी राजपूत शासक
  • माता: मीणादेवी / मेणादेवी
  • बड़े भाई: वीरमदेव जी
  • मान्यता: भगवान कृष्ण के भक्त अजमल जी ने द्वारका जाकर कृष्ण से पुत्र का वरदान माँगा — इसी वरदान के फलस्वरूप रामदेव जी का जन्म हुआ। अतः उन्हें कृष्ण का अवतार माना जाता है।
📅 जीवन की प्रमुख घटनाएं
1352 ई.
रूणिचा (बाड़मेर) में जन्म — चैत्र सुदी पंचमी को
बचपन
बचपन से ही अलौकिक शक्तियाँ प्रकट। भूखों को भोजन, बीमारों को स्वस्थ करना शुरू।
किशोरावस्था
भैरव नामक राक्षस का वध किया। गरीबों और दलितों की सेवा में जीवन समर्पित।
मध्यकाल
मक्का से पाँच पीर रामदेव जी की शक्तियों की परीक्षा लेने आए — प्रभावित होकर उन्हें "रामशाह पीर" की उपाधि दी।
1385 ई.
संवत् 1442 में मात्र 33 वर्ष की आयु में रूणिचा धाम में जीवित समाधि ली।
1931 ई.
महाराजा गंगा सिंह (बीकानेर) ने समाधि के चारों ओर भव्य मंदिर का निर्माण करवाया।
✨ प्रमुख चमत्कार एवं कार्य
🏥

रोगमुक्ति

बीमारों, कोढ़ियों और अपंगों को स्वस्थ करना — उनकी अलौकिक शक्ति का प्रमुख प्रमाण।

🍚

भूखों को भोजन

भूखे और दरिद्र लोगों को भोजन कराना — दानवीरता का अनुपम उदाहरण।

🐴

समुद्र पर घोड़े

लीला घोड़े पर सवार होकर समुद्र पर घोड़े दौड़ाने की अलौकिक लीला।

🫙

पाँच पीरों का परीक्षण

मक्का से आए पाँच पीरों के उपकरण मक्का से हवा में उड़ाकर रामदेवरा लाना।

⚔️

भैरव राक्षस वध

भैरव नामक राक्षस का वध कर क्षेत्र की जनता को भय मुक्त किया।

🛡️

शोषितों की रक्षा

गरीबों, दलितों और शोषितों की सदा रक्षा की — न्याय का प्रतीक बने।

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रामदेवरा मेले में श्रद्धालु – भाद्रपद नवरात्रि राजस्थान
🎪 रामदेवरा मेले में श्रद्धालु — भाद्रपद माह में विशाल मेला
📷 Wikimedia Commons | CC BY-SA 3.0 | स्रोत: commons.wikimedia.org
🎪 रामदेवरा मेला

🪔 विश्व प्रसिद्ध रामदेवरा मेला

  • कब: भाद्रपद शुक्ल पक्ष (भादो सुदी 2 से 10) — अगस्त-सितम्बर में
  • अवधि: 15 दिन तक लगातार
  • कहाँ: रामदेवरा, जैसलमेर जिला (पोखरण से 12 km)
  • यह मेला हिंदू और मुस्लिम दोनों श्रद्धालुओं द्वारा मनाया जाता है।
  • राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश से लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा करके आते हैं।
  • मेले में रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और तेरहताली नृत्य का आयोजन होता है।
  • मेले के दौरान रामसागर तालाब में स्नान पवित्र माना जाता है।
🙏 आराधना और परम्पराएं

🐴 लीला घोड़ा और अन्य परम्पराएं

  • रामदेव जी का लीला घोड़ा (सफेद घोड़ा) विशेष रूप से पूजनीय है — श्रद्धालु मिट्टी के घोड़े अर्पित करते हैं।
  • रामापीर की फड़ — रामदेव जी की जीवन कथा का चित्रण, गाँव-गाँव गाई जाती है।
  • तेरहताली नृत्य — कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा 13 मंजीरों के साथ रामदेव जी की आराधना में किया जाता है।
  • हिंदू-मुस्लिम एकता: दोनों धर्मों के लोग श्रद्धा से पूजा करते हैं।
  • मेघवाल समुदाय के भक्त रामदेव जी के परम भक्त माने जाते हैं।
  • पाँच पीरों की दरगाह: मंदिर परिसर में मक्का के पाँच पीरों की समाधि भी है।
📋 मंदिर की जानकारी
मंदिर का नामश्री रामदेव जी मंदिर (रामदेवरा धाम)
स्थानरामदेवरा गाँव, जैसलमेर जिला (पोखरण से 12 km)
निर्माणकर्तामहाराजा गंगा सिंह (बीकानेर), 1931 ई.
मंदिर सामग्रीईंट-गारा, चाँदी की नक्काशी, रंगीन चित्र
मुख्य आकर्षणरामदेव जी की बैठी हुई मूर्ति, लीला घोड़े की प्रतिमाएँ, रामसागर तालाब
आरती समय5:00 AM, 9:00 AM, 7:00 PM, 10:00 PM
प्रवेश शुल्कनि:शुल्क
निकटतम रेलवेरामदेवरा रेलवे स्टेशन
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💡

परीक्षा टिप: रामदेव जी के जन्म वर्ष (संवत् 1409), समाधि (संवत् 1442), लीला घोड़ा, तेरहताली नृत्य, कामड़ जाति, रामदेवरा मेला — ये सब हर परीक्षा में जरूर आते हैं!

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
रामदेव जी का जन्म कहाँ हुआ था?

रामदेव जी का जन्म राजस्थान के बाड़मेर जिले के रूणिचा गाँव में संवत् 1409 (1352 ई.) में हुआ था। वर्तमान में यह स्थान जैसलमेर जिले में है।

रामदेवरा मेला कब और कहाँ लगता है?

रामदेवरा मेला प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष (अगस्त-सितम्बर) में 15 दिन तक रामदेवरा, जैसलमेर में लगता है।

रामदेव जी को रामापीर क्यों कहते हैं?

मक्का से आए पाँच पीरों ने रामदेव जी की अलौकिक शक्तियों से प्रभावित होकर उन्हें "रामशाह पीर" (रामापीर) की उपाधि दी।

तेरहताली नृत्य किससे सम्बन्धित है?

तेरहताली नृत्य कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा 13 मंजीरों के साथ रामदेव जी की आराधना में किया जाता है।

रामदेव जी के लीला घोड़े का क्या महत्व है?

लीला घोड़ा रामदेव जी का प्रिय श्वेत अश्व था। श्रद्धालु मनोकामना पूर्ण होने पर मंदिर में मिट्टी या लकड़ी के घोड़े अर्पित करते हैं।

रामदेव जी की समाधि किसने बनवाई?

रामदेव जी की समाधि के चारों ओर मंदिर का निर्माण बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने 1931 ई. में करवाया।

📚 परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

1रामदेव जी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
→ संवत् 1409 (1352 ई.) में रूणिचा (बाड़मेर/जैसलमेर), चैत्र सुदी पंचमी
2रामदेव जी के पिता का नाम क्या था?
→ अजमल जी (तंवर वंशी राजपूत)
3रामदेव जी के माता का नाम क्या था?
→ मीणादेवी / मेणादेवी
4रामदेव जी को किसका अवतार माना जाता है?
→ भगवान कृष्ण (विष्णु) का अवतार
5रामदेव जी ने समाधि कब ली?
→ संवत् 1442 (1385 ई.) में, 33 वर्ष की आयु में
6रामदेव जी का समाधि स्थल कहाँ है?
→ रूणिचा धाम (रामदेवरा), जैसलमेर जिला, पोखरण से 12 km
7रामदेवरा मेला कब लगता है?
→ भाद्रपद शुक्ल पक्ष (भादो सुदी 2 से 10), अगस्त-सितम्बर में 15 दिन
8तेरहताली नृत्य किस जाति से सम्बन्धित है?
→ कामड़ जाति (महिलाएं 13 मंजीरों के साथ नृत्य करती हैं)
9रामदेव जी के घोड़े का नाम क्या था?
→ लीला घोड़ा (श्वेत घोड़ा)
10रामदेव जी को मुस्लिम किस नाम से पूजते हैं?
→ रामशाह पीर / रामापीर
11रामदेव जी के मंदिर का निर्माण किसने करवाया?
→ महाराजा गंगा सिंह (बीकानेर) ने 1931 ई. में
12रामदेव जी के परम भक्त कौन से समुदाय माने जाते हैं?
→ मेघवाल समुदाय और कामड़ जाति
13"रामापीर की फड़" क्या है?
→ रामदेव जी के जीवन की कथाओं का चित्रांकन जो गाँव-गाँव में गाया जाता है
14रामदेवरा में रामसागर तालाब का महत्व क्या है?
→ इसे रामदेव जी ने स्वयं बनवाया था — इसमें स्नान पवित्र माना जाता है
15रामदेव जी के भाई का नाम क्या था?
→ वीरमदेव जी (बड़े भाई)
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📋 सम्पूर्ण सारांश तालिका
पूरा नामरामदेव जी (रामापीर / रामशाह पीर)
जन्मसंवत् 1409 (1352 ई.) — चैत्र सुदी पंचमी
जन्म स्थानरूणिचा, बाड़मेर (अब जैसलमेर जिला)
पिताअजमल जी (तंवर राजपूत)
मातामीणादेवी / मेणादेवी
अवतारभगवान कृष्ण का अवतार
समाधिसंवत् 1442 (1385 ई.), 33 वर्ष की आयु में
समाधि स्थलरामदेवरा (रूणिचा), जैसलमेर
मंदिर निर्माणमहाराजा गंगा सिंह, 1931 ई.
घोड़ालीला घोड़ा (श्वेत अश्व)
मुस्लिम नामरामशाह पीर / रामापीर
सम्बन्धित जातिकामड़ जाति, मेघवाल समुदाय
नृत्यतेरहताली नृत्य (13 मंजीरे)
प्रमुख मेलारामदेवरा मेला — भाद्रपद शुक्ल पक्ष
पवित्र ग्रंथ/गीतरामापीर की फड़

✍️ याद रखने की ट्रिक

"राम (1409) अजमल (पिता) रूणिचा (जन्म) → लीला घोड़ा → तेरहताली (कामड़) → 1442 समाधि → गंगा सिंह मंदिर"

R = Runicha (जन्म)  |  A = Ajmal (पिता)  |  M = Meghwal (भक्त)  |  D = Dalibai (शिष्या)  |  E = Ekta (हिंदू-मुस्लिम)  |  V = Vishnu Avatar

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