माउंट आबू और 89 गाँव — जब राजस्थान का हिल स्टेशन गुजरात में चला गया था!
सिरोही रियासत के विभाजन की वह अनसुनी कहानी जो सिरोही विभाजन के नाम से जाती है
स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में देश की रियासतों को भारत संघ में मिलाने की प्रक्रिया शुरू हुई। राजस्थान के गठन के समय सिरोही रियासत को लेकर एक जटिल राजनीतिक स्थिति बनी।
उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष गोकुल भाई भट्ट सिरोही जिले के हाथल गाँव के मूल निवासी थे। राजनीतिक दबाव के चलते हाथल गाँव को राजस्थान में रखा गया — परन्तु इसके बदले माउंट आबू, देलवाड़ा तहसील और 89 गाँव तत्कालीन बॉम्बे स्टेट को सौंप दिए गए।
(आबू को बॉम्बे में मिलाने के निर्णय पर उनका जवाब)
सरदार पटेल के इस वक्तव्य से यह स्पष्ट होता है कि माउंट आबू को बॉम्बे स्टेट में मिलाना एक राजनीतिक निर्णय था, न कि भौगोलिक आधार पर। इस फैसले से सिरोही और आबू के स्थानीय लोगों में भारी असंतोष फैला।
- सिरोही रियासत का विभाजन हुआ — आबू बॉम्बे में, शेष सिरोही राजस्थान में।
- माउंट आबू, देलवाड़ा सहित 89 गाँव बॉम्बे स्टेट में मिलाए गए थे।
- गोकुल भाई भट्ट के गाँव (हाथल) को राजस्थान में रखा गया — वे उस समय कांग्रेस अध्यक्ष थे।
- राज्य पुनर्गठन आयोग = फजल अली आयोग (1953) — इसी ने सभी सीमा विवाद सुलझाए।
- 1 नवम्बर 1956 को आबू-देलवाड़ा राजस्थान में मिले — यही राजस्थान दिवस है।
- राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों व 8 साल 7 माह 14 दिन में पूरा हुआ।
- 7वाँ और अंतिम चरण — 1 नवम्बर 1956 (माउंट आबू + अजमेर-मेरवाड़ा + सुनेल-टप्पा)।
- 7वाँ संविधान संशोधन 1956 — राज्यप्रमुख का पद समाप्त, राज्यपाल पद लागू हुआ।
- माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है (जिला — सिरोही)।
RPSC 1st Grade, 2nd Grade, RAS, REET, Patwari, SI सभी परीक्षाओं में राजस्थान का एकीकरण एक स्थायी टॉपिक है। माउंट आबू का विलय, गोकुल भाई भट्ट की भूमिका, फजल अली आयोग की सिफारिशें और सिरोही रियासत का विभाजन — इन सभी बिंदुओं से प्रतिवर्ष 1 से 3 प्रश्न ज़रूर आते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को Timeline के रूप में याद करना सबसे आसान तरीका है। 1947 → 1948 → 1949 → 1953 → 1956 — इन पाँच वर्षों की घटनाएँ क्रम से याद करें और परीक्षा में पूरे अंक पाएं।