भरतपुर जिला दर्शन - Rajasthan Study

भरतपुर जिला दर्शन

 

भरतपुर जिला दर्शन | Bharatpur District Darshan 



भरतपुर जिला, राजस्थान के पूर्वी भाग में स्थित, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर पक्षी अभयारण्य) जैसी विश्व प्रसिद्ध जगहों, जाट राजवंश की विरासत, मजबूत स्थापत्य कला और विविध लोक संस्कृति के कारण यह जिला “पूर्वी राजस्थान का प्रवेश द्वार” कहलाता है।


📍 भरतपुर जिले का संपूर्ण विवरण

विशेषताविवरण
अक्षांश‑देशांतरलगभग 27.216° N, 77.489° E
कुल क्षेत्रफललगभग 5,066 वर्ग किलोमीटर 
भौगोलिक सीमाएँउत्तर‑पूर्व में उत्तर प्रदेश (मथुरा, आगरा), दक्षिण में धौलपुर, पश्चिम में करौली और दौसा जिलों से सीमाएँ; पूर्व भी यूपी से जुड़ा है। 
जलवायुगर्मियों में तापमान ~45°C तक, सर्दियों में ~5°C तक; वर्षा का पैटर्न सीज़नल।

👥 जनसंख्या एवं साक्षरता दर (2011 जनगणना)

घटकविवरण
कुल जनसंख्या2,548,462 लोग 
पुरुष1,355,726 
महिला1,192,736 
लिंगानुपातलगभग 880 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुष 
बाल आबादी (0‑6 वर्ष)436,165 (लगभग 17% जनसंख्या) 
औसत साक्षरता दर70.11% 
पुरुष साक्षरता84.10% 
महिला साक्षरता54.24% 
शहरी‑ग्रामीण विभाजनलगभग 19.4% शहरी और 80.6% ग्रामीण आबादी 

🏛 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि



  • नामकरण: संस्कृत ग्रंथों के अनुसार ‘भरतपुर’ नाम भरत नामक पुरातन राजा से जुड़ा है।

  • जाट राजवंश की स्थापना, महाराजा सूरजमल के शासनकाल में लोहागढ़ दुर्ग और कृष्णविलास महल जैसे महल‑उदाहरण बने। 

  • 1948‑49 में भरतपुर राज्य राजस्थान संघ में शामिल हुआ।


🏞 पर्यटन एवं सांस्कृतिक धरोहर



  • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo Bird Sanctuary) — शीतकाल में प्रवासी पक्षियों का आगमन, जीव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण।

  • लोहागढ़ दुर्ग — “अजेय दुर्ग” नाम से प्रसिद्ध।

  • जवाहर बुर्ज — दिल्ली विजय की स्मृति में निर्मित।

  • बयाना दुर्ग, महल, मंदिरों‑हवेलियों की स्थापत्य कला की झलक।


🌾 भूगोल एवं कृषि‑वित्तीय महत्व

  • नदियाँ जैसे बाणगंगा, गंभीर आदि जिले में कृषि और जलापूर्ति के लिए महत्वपूर्ण। 

  • मिट्टी उपजाऊ, खेतीदार क्षेत्रों में सरसों, बाजरा आदि की फसलें होती हैं।

  • खनिज व निर्माण सामग्री (लाल पत्थर) की उपलब्धता कुछ हद तक।


🎭 सांस्कृतिक विरासत एवं अवसंरचना

  • लोक नृत्य‑संगीत: बम नृत्य, नौटकी लोकनाट्य आदि।

  • त्योहार एवं मेले: क्षेत्रीय धार्मिक मेलों, सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन।

  • शिक्षा संस्थाएँ: सरकारी एवं निजी स्कूल, कुछ उच्च शिक्षा‑संस्थान जिले में मौजूद हैं।


🏫 प्रमुख संस्थान एवं व्यक्ति

  • भरतपुर में चिकित्सा, शिक्षा और कला से जुड़े कई कॉलेज और संस्थान मौजूद हैं। 

  • प्रसिद्ध लोग: राजनीतिक हस्तियाँ, साहित्यकार, समाजसेवी आदि। (उदा. लालसोट से जुड़े लोग)


✅ निष्कर्ष

भरतपुर जिला राजस्थान की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों का दिल है। जनसंख्या एवं शिक्षा के आंकड़े दर्शाते हैं कि जिले में पर्याप्त प्रगति हुई है — साक्षरता दर 70% से ऊपर है, लेकिन महिला साक्षरता अभी भी सुधार की मांग करती है। पर्यटन, संरक्षित वन्यजीव अभयारण्य और सामाजिक‑धार्मिक विविधता इसे विशेष बनाते हैं। यदि शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसंरचना पर निरंतर निवेश हो, तो भरतपुर अपनी पहचान और मजबूत करेगा।



भरतपुर जिला दर्शन

राजस्थान की संपूर्ण जानकारी का भंडार