चूहों वाला मंदिर (Rat Temple of India)
देशनोक का करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है।
यह बीकानेर शहर से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण में देशनोक कस्बे में स्थित है। यह स्थान सड़क और रेल मार्ग दोनों से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
इतिहास
करणी माता को शक्ति की अवतार और दुर्गा माता का रूप माना जाता है।
वे 14वीं–15वीं शताब्दी की महान संत और समाज सुधारक थीं। करणी माता का जन्म चारण समुदाय में हुआ था और उन्हें राजपूत शासकों की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है।
मान्यताएं
बीकानेर और जोधपुर रियासतों की स्थापना में करणी माता का आशीर्वाद था
➡️राव बीका (बीकानेर के संस्थापक) करणी माता के परम भक्त थे
मंदिर के चूहे करणी माता के भक्तों और उनके वंशजों के पुनर्जन्म माने जाते हैं
किसी चूहे को नुकसान पहुँचना अशुभ माना जाता है
यदि कोई भक्त गलती से चूहे को मार दे, तो उसे चाँदी का चूहा चढ़ाना पड़ता है
चूहों द्वारा खाया गया प्रसाद अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है
विशेष रूप से सफेद चूहे को देखना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि उन्हें करणी माता और उनके पुत्रों का प्रतीक माना जाता है।
मंदिर का इतिहास
देशनोक के करणी माता मंदिर का वर्तमान स्वरूप 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में महाराजा गंगा सिंह द्वारा बनवाया गया।
मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर से किया गया है और इसके द्वारों पर सुंदर चाँदी की नक्काशी देखने को मिलती है।
यह मंदिर समय के साथ राजस्थान के सबसे रहस्यमय और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल हो गया।
➡️करणी माता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ रहने वाले हज़ारों चूहे, जिन्हें स्थानीय भाषा में काबा (Kaba) कहा जाता है।
मंदिर की स्थापत्य विशेषताएँ
➡️सफेद संगमरमर से निर्मित भव्य संरचना
➡️चाँदी के सुंदर द्वार
➡️गर्भगृह में करणी माता की प्रतिमा
➡️चारों ओर खुले प्रांगण
➡️मंदिर के भीतर स्वतंत्र रूप से घूमते चूहे
➡️मंदिर की सादगी और पवित्र वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
करणी माता मंदिर:
शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है
चारण और राजपूत समुदाय के लिए अत्यंत पूजनीय है
नवरात्रि के समय यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है
देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं
यह मंदिर यह दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति में जीव मात्र के प्रति करुणा और सम्मान कितना गहरा है।
देशनोक मंदिर से जुड़ी मान्यताएँ और चमत्कार
चूहों के बीच खुले पैर चलने के बावजूद रोग न लगना
प्रसाद साझा करने से मनोकामना पूर्ण होना
सफेद चूहे के दर्शन से सौभाग्य प्राप्त होना
इन्हीं रहस्यमयी मान्यताओं के कारण यह मंदिर आस्था और विज्ञान – दोनों के लिए चर्चा का विषय बना रहता है।
