राजस्थान का सास–बहू मंदिर: इतिहास, वास्तुकला और रहस्य | Sas Bahu Temple Rajasthan - Rajasthan Study

राजस्थान का सास–बहू मंदिर: इतिहास, वास्तुकला और रहस्य | Sas Bahu Temple Rajasthan

राजस्थान अपनी ऐतिहासिक धरोहर, प्राचीन मंदिरों और अद्वितीय स्थापत्य कला के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण नाम है सास–बहू मंदिर, जो उदयपुर जिले के नागदा गाँव में स्थित है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला और मध्यकालीन इतिहास का एक जीवंत प्रमाण भी है।
Sas bahu mandir

👉सास–बहू मंदिर कहाँ स्थित है?
सास–बहू मंदिर राजस्थान के उदयपुर जिले से लगभग 22 किलोमीटर उत्तर में नागदा नामक प्राचीन नगर में स्थित है।

                             परिचय 

नागदा कभी मेवाड़ राज्य की राजधानी हुआ करता था और यह स्थान उस समय धार्मिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध माना जाता था।

              सास–बहू मंदिर के नाम का रहस्य

अधिकांश लोग इस मंदिर का नाम सुनकर इसे सास और बहू के पारिवारिक संबंध से जोड़ देते हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

“सास” शब्द सहस्र (1000) से उत्पन्न माना जाता है, जिसका अर्थ है हज़ार स्तंभों वाला मंदिर। कालांतर में सहस्र शब्द का अपभ्रंश होकर “सास” बन गया और इसी से यह मंदिर सास–बहू मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

              सास–बहू मंदिर का इतिहास

सास–बहू मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी ईस्वी में गुहिल वंश के शासक महाराणा अल्लाट के शासनकाल में हुआ माना जाता है।
यह मंदिर भगवान विष्णु (हरिहर रूप) को समर्पित है और उस समय वैष्णव संप्रदाय का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र था।

इतिहासकारों के अनुसार, नागदा उस काल में एक समृद्ध नगर था, जहाँ से मेवाड़ के राजनीतिक और धार्मिक कार्य संचालित होते थे।

स्थापत्य कला: मारू-गुर्जर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण
सास–बहू मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अद्भुत स्थापत्य कला है। यह मंदिर मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली में निर्मित है, जो राजस्थान और गुजरात क्षेत्र की विशिष्ट शैली मानी जाती है।

                  स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएँ:
➡️मंदिर परिसर में दो अलग-अलग मंदिर हैं
➡️बड़ा मंदिर “सास” और छोटा मंदिर “बहू” कहलाता है
➡️स्तंभों पर अत्यंत बारीक नक्काशी
➡️देवी-देवताओं, नृत्यांगनाओं और पौराणिक कथाओं के दृश्य
➡️जालीदार खिड़कियाँ और सुंदर मंडप
➡️पत्थर पर उकेरी गई सूक्ष्म शिल्पकला
हालाँकि आज मंदिर का कुछ भाग खंडित अवस्था में है, फिर भी इसकी कलात्मक सुंदरता आज भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

                          धार्मिक महत्व

➡️यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण वैष्णव परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है।
प्राचीन काल में यहाँ नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ और पर्व आयोजित किए जाते थे। आज भी श्रद्धालु यहाँ दर्शन करने आते हैं और इसे एक पवित्र स्थल मानते हैं।

                     नागदा का ऐतिहासिक महत्व
नागदा केवल सास–बहू मंदिर के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन इतिहास के लिए भी प्रसिद्ध है।
यह स्थान कभी मेवाड़ की राजधानी रहा है और यहाँ कई अन्य प्राचीन मंदिरों और संरचनाओं के अवशेष भी पाए जाते हैं, जो इस क्षेत्र के गौरवशाली अतीत को दर्शाते हैं।
सास–बहू मंदिर का वर्तमान स्वरूप
समय के साथ प्राकृतिक आपदाओं और ऐतिहासिक आक्रमणों के कारण मंदिर को नुकसान पहुँचा, फिर भी यह आज भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।

                          यह मंदिर आज:

इतिहास प्रेमियों
स्थापत्य कला के विद्यार्थियों
शोधकर्ताओं
फोटोग्राफरों
के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
सास–बहू मंदिर घूमने का सही समय
सास–बहू मंदिर घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।
इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और मंदिर परिसर की सुंदरता और भी निखरकर सामने आती है।


                    सास–बहू मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

1000 वर्ष पुराना ऐतिहासिक मंदिर
उत्कृष्ट मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली
बारीक और दुर्लभ पत्थर नक्काशी
मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा स्थल
धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण

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