मंदिरों की नगरी करौली जिला दर्शन - Rajasthan Study

मंदिरों की नगरी करौली जिला दर्शन

 

मंदिरों की नगरी करौली जिला दर्शन | Karauli District 



करौली जिला राजस्थान के पूर्वी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध जिला है। “मंदिरों की नगरी” नाम से प्रख्यात, करौली में प्राचीन किला, मंदिर, नदियाँ, और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण के केंद्र हैं।


📍 करौली जिले का संपूर्ण विवरण

विशेषताविवरण
अक्षांश‑देशांतरलगभग 26.50° N, 77.02° E
कुल क्षेत्रफललगभग 5,530 वर्ग किलोमीटर (अनुभवजन्य अनुमान)
स्थापना/जिला दर्जा19 जुलाई 1997 (सवाई माधोपुर से अलग होकर)
भूभाग एवं सीमाएँअरावली की पर्वतमाला व निचला मैदान; सीमाएँ मध्य प्रदेश, सवाई माधोपुर, धौलपुर, दौसा, टोंक जिलों से लगती हैं।
जलवायुगर्मियों में तापमान लगभग 46°C तक, सर्दियों में लगभग 5‑6°C; वर्षा सीमित और असमान।

👥 जनसंख्या एवं शिक्षा दर (साक्षरता)

करौली जिले के 2011 की जनगणना और विभिन्न सरकारी व गैर‑सरकारी स्रोतों से उपलब्ध झलक:

घटकविवरण
कुल जनसंख्या (2011 अनुमान)करीब 1,454,000‑1,500,000 लोग (अनुमान‑आधारित)
लिंगानुपातलगभग 889‑900 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुष (अनुमान)
साक्षरता दर (कुल जिला)लगभग 60‑65% (अनुमानित आधार पर)
पुरुष साक्षरतालगभग 75‑80% हो सकती है
महिला साक्षरताअपेक्षाकृत कम, करीब 45‑50% हो सकती है



🏰 प्रशासनिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि



  • करौली जिले की स्थापना: 1040 ई. में यादव वंश द्वारा (महाराजा विजयपाल)

  • जिला दर्जा मिला: 19 जुलाई 1997

  • शुभंकर: घड़ियाल

  • उपनाम: कल्याणपुरी, डांग की रानी, राजस्थान का वृंदावन आदि।

  • ऐतिहासिक घटनाएँ: मत्स्य संघ में शामिल होना, अंग्रेजों के साथ संधियाँ, 1857 का विद्रोह आदि।


🌊 भौगोलिक विशेषताएँ

  • प्रमुख नदियाँ: पार्वती नदी, भद्रावती नदी, कालीसिल नदी

  • मैदान व पहाड़ का मिश्रण: अरावली की छोटी‑बड़ी चोटियाँ, पर्वतीय पठार, मैदान क्षेत्रों के बीच अन्तराल।


🛕 प्रमुख धार्मिक स्थल



  • कैलादेवी मंदिर – यादव वंश की कुलदेवी; त्रिकुट पर्वत पर स्थित।

  • महावीर जी मंदिर – पुरानी जैन मूर्ति सहित।

  • अंजनी माता मंदिर – अनूठी छवि जहाँ अंजनी माता द्वारा हनुमानजी को स्तनपान कराती प्रतिमा है।

  • मदन मोहन जी मंदिर – गौड़ीय संप्रदाय से संबंधित।


🏯 ऐतिहासिक दुर्ग एवं स्थापत्य कला

  • तिम्मनगढ़ दुर्ग

  • मण्डरायल दुर्ग

  • ऊँटागिरी दुर्ग

  • राव गोपाल सिंह की छतरी आदि स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण।


🎭 सांस्कृति विरासत

  • लोक नाट्य शैली: कन्हैया ख्याल, घुटकन नृत्य

  • स्थानीय मेले एवं त्योहार: होली‑दिवाली; वार्षिक धार्मिक मेलों का आयोजन।

  • हस्तशिल्प एवं स्थानीय कला‑संस्कृति: पान की खेती, पारंपरिक पहना‑ओढ़ना, लोक गीत एवं संगीत।


🌱 आर्थिक एवं प्राकृतिक संसाधन

  • पान की खेती – एक विशेष फसल जो करौली की विशिष्टता बनाती है।

  • हस्तशिल्प एवं स्लेट निर्माण – स्थानीय संसाधन व पारंपरिक तकनीक पर आधारित।

  • जल प्रबंधन: पाँचना बांध और अन्य नदियों का उपयोग सिंचाई व जल संरक्षण में।


🐾 वन्यजीव एवं पर्यटन

  • कैलादेवी अभयारण्य – तेंदुआ, सांभर, चिंकारा जैसे वन्य जीवों का आवास।

  • प्राकृतिक स्थल, पहाड़ियाँ, नदियों के किनारे पर्यटन स्थलों का विकास।

  • धार्मिक पर्यटन: कैलादेवी, महावीर मंदिर आदि।


🏫 शिक्षा एवं सामाजिक योगदान

  • साक्षरता दर में सुधार की दिशा में कार्य चल रहा है। विशेषकर ग्रामीण भागों की शिक्षा व लड़कियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान।

  • सामाजिक योगदान: प्रजामंडल आंदोलन, स्थानीय पुस्तकालय, साहित्य सेवा, लोक शिक्षा कार्यक्रम।


📌 अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • करौली “मंदिरों की नगरी” के नाम से जाना जाता है।

  • कल्याणपुरी नाम, उपनाम तथा सांस्कृतिक पहचान।

  • प्राकृतिक संसाधन व जल प्रबंधन की चुनौतियाँ और अवसर दोनों हैं।


✅ निष्कर्ष

करौली जिला राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर, धार्मिक विविधता और प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण जिला है। जहां एक ओर कैलादेवी मंदिर, अभयारण्य और किलों की शान है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा, जनसंख्या व समाज सेवा की दिशा में सुधार की क्षमता है। जनसंख्या और शिक्षा के आँकड़े यह दर्शाते हैं कि करौली आगे बढ़ने के रास्ते पर है। यदि उचित निवेश, संसाधन प्रबंधन और नीति निर्माण हो, तो यह जिला और अधिक समृद्ध हो सकता है।



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